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मंगलवार, 21 जून 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहते हैं ये लड़की एक दिन देश का गौरव बने

पुणे के हदप्सर बस डिपो की दो लाईन पार करने के बाद रायगढ़ कॉलोनी आती है जहां पर एक छह साल की लड़की अपने पिता, चाचा और दादी मां के साथ रहती है। वैशाली नाम की इस बच्ची को जब से प्रधानमंत्री मोदी के हाथों से लिखा खत मिला है उसकी खुशी के ठिकाने नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक दरअसल, वैशाली नाम की इस बच्ची का प्रधानमंत्री कार्यालय की मदद से बेहद गंभीर हार्ट आपरेशन हुआ है, जो खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों लिखे खत को पाकर बेहद अचंभित है। वैशाली ने पहला खत प्रधानमंत्री के नाम लिख उनसे मदद मांगी थी ताकि उनका ये ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो। उसके बाद उसने दूसरा पत्र मोदी सरकार के नाम से थैंक्स के लिए लिखा था।

गुरुवार, 26 मई 2016

कांग्रेस का तंज, '2 साल में देश मांगे हिसाब, किसका साथ और कहां है विकास?

कांग्रेस का तंज, '2 साल में देश मांगे हिसाब, किसका साथ और कहां है विकास?
कांग्रेस का तंज, '2 साल में देश मांगे हिसाब, किसका साथ और कहां है विकास?
केंद्र की मोदी सरकार के दो साल पूरे हो गए। इस मौके पर केंद्र सरकार जहां विकास पर्व मना रही है, वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने में लगी है। अहमदाबाद में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि अब लोग कह रहे हैं कि 'कोई लौटा दो बीते हुए दिन'। वहीं दिल्ली में कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा भाषणवीर मोदी दो साल में कर्मवीर नहीं बन पाए। कांग्रेस नेताओं ने तंज करते हुए पूछा कि दो सााल में देश मांगे हिसाब, किसका साथ और कहां है विकास?
कांग्रेस ने मोदी सरकार के साल के दो साल पूरे होने के मौके पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए मोदी सरकार पर हमला बोला। उनहोंने कहा कि भाषणवीर मोदी दो साल में कर्मवीर नहीं बन पाए। सिर्फ भाषण, शासन नहीं। रनदीप सुरजेवाला ने कहा कि 'मोदी स्तुति' ही इस सरकार का चरित्र बन गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता मोदी की तुलना भगवान से करने लगे हैं।
गुलाम नबी आजाद ने मोदी सरकार पर तंज करते हुए कहा कि 'हर शाख पे उल्लू बैठे हैं, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा। या रब वो न समझे हैं, न समझेंगे मेरी बात । आजाद ने कहा कि मोदी सरकार ने खोखले वादे किए। देश की अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता है, मंहगाई बढ़ गई है। बैंकिंग सिस्टम ध्वस्त हो रहा है, ब्लैक मनी वापस लाने का वादा तो खोखला ही था। यह सरकार योजनाओं का नाम बदलकर उनकी रीपैकेजिंग करने में माहिर है।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

मोदी सरकार ने हटाए रेलवे से राजनीति के रेड सिग्नल, अब होगी राज्यनीति

मोदी सरकार ने हटाए रेलवे से राजनीति के रेड सिग्नल, अब होगी राज्यनीति
मोदी सरकार ने हटाए रेलवे से राजनीति के रेड सिग्नल, अब होगी राज्यनीति
रेलवे से राजनीति के रेड सिग्नल मोदी सरकार ने हटा दिए हैं। रेलवे की कार्यशैली में अब राजनीति के बजाय राज्यनीति है। सुविधा और सहयोग की पटरियों पर अब केंद्र-राज्य सरकारें मिलकर चलेंगी। कभी बंगाल तो कभी बिहार या किसी एक राज्य की चाहतों में अटकता रहा सुरेश प्रभु का रेल बजट अब राजनीतिक आग्रहों और पूर्वाग्रहों से आजाद होकर ज्यादा राष्ट्रीय रंग-रूप के साथ निकला है।

बजट में घोषणाएं नहीं, बल्कि उनके अमल और रेलवे की पूरी कार्यशैली बदलने की दिशा स्पष्ट दिखती है। लंबे अरसे बाद ऐसा हुआ है कि रेल मंत्रालय मुख्य सत्ताधारी दल के पास आया है। गठबंधन सरकारों का युग आने के बाद पिछले कुछ समय से रेल मंत्रालय सहयोगी दलों के पास ही रहा। सहयोगी दल किसी राज्य या क्षेत्र विशेष से होते रहे। नतीजतन उनके बजट में उनके अपने सियासी हित ज्यादा रहे। राजनीतिक मजबूरियों के चलते रेलवे में सुधार की प्रक्रिया धीमी रही। घोषणाएं और रियायतों की मानसिकता हावी रही। अपने क्षेत्रों में सियासी हित साधने के लिए रेलवे के संसाधनों के दुरुपयोग से भी नेता नहीं चूके।