मंगलवार, 8 मार्च 2016

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: दुनिया डराएगी, पर डरने का नहीं...!!!

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: दुनिया डराएगी, पर डरने का नहीं...!!!
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: दुनिया डराएगी, पर डरने का नहीं...!!!
विश्व महिला दिवस यानि एक बार फिर जगह-जगह समारोह, भाषणबाजी, बड़े-बड़े संकल्प व वादे और फिर स्थिति जस की तस। आखिर कब तक महिलाएं महज विचार-विमर्श की विषय-वस्तु बनकर रहेंगी। फिर खुद महिलाओं का ध्यान इस ओर क्यों नहीं जाता कि समस्याएं उनकी, चुनौतियां उनकी तो फिर पुरुष वर्ग कौन होते हैं उनको सशक्त बनाने वाले? देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी इस बार महिला जनप्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए यह गंभीर सवाल उठाया है और वाकई में यह असल मायने में विचार-मंथन का विषय है खास तौर से महिलाओं के लिए। मोदी जी ने कहा, 'मेरे हिसाब से महिला सशक्तिकरण को लेकर सोच बदलने की जरूरत है। आप उसे सशक्त बनाते हैं, जो कमजोर है। जिनके पास क्षमता है शक्ति है, उसे सशक्तिकरण की जरूरत नहीं।'

सच में, अब तक जो पुरुष वर्ग, महिलाओं के साथ असमानता का व्यवहार करता और उनके अस्तित्व को कुचलता रहा है, सिर्फ उस वर्ग से ही 'महिला उत्थान' की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि पुरुष वर्ग की महत्ता को नकार रहे हैं, समाज में दोनों वर्गों का समान स्थान है। मगर दुनिया की आधी आबादी के प्रति सहयोगात्मक रवैया न अपनाते हुए उसे अधिकारों से वंचित रखने, हमेशा कम आंकने में कहीं ना कहीं ये वर्ग ही जिम्मेदार है। ऐसा भी नहीं है कि स्थितियों में सुधार नहीं हुआ है, मगर यह एक खास तबके की महिलाओं के परिप्रेक्ष्य में है। अगर हम सिर्फ शहरी और ग्रामीण तबके की महिलाओं की बात करें तो भी उनके बीच व्यापक अंतर नजर आता है, जिसे खत्म करने में पुरुष, परिवार, समाज, सरकार के साथ-साथ खुद महिलाओं को निडर होकर आगे आना होगा। तमाम बंदिशें लगाएगी, दुनिया डराएगी, पर डरने का नहीं...!!!


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