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मंगलवार, 26 जुलाई 2016

सैटेलाइट केस में भारत की हार, भरना पड़ सकता है 1 बिलियन डॉलर का जुर्माना

अंतराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में दो सैटेलाइट डील को रद्द करने का केस हारने पर भारत को हर्जाने के तौर पर 1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। यही नहीं इस फैसले से अंतराष्ट्रीय निवेशकों के आगे भारत की छवि भी खराब हो सकती है।
दरअसल अंतरिक्ष ने एस बैंड स्पैक्ट्रम के तहत दो लंबी दूरी के सैटेलाइट को लॉन्च करने का करार किया था जिसे 2011 में रद्द कर दिया गया। सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि सरकार ने इस मामले में लगत तरीके से काम किया जिससे देवास मल्टीमीडिया के निवेशकों को काफी घाटा उठाना पड़ा।
द हॉग में स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने देवास मल्टीमीडिया द्वारा भारत सरकार के खिलाफ दायर केस में भारत सरकार को दोषी पाया है। इसरो के लिए व्यवसायिक सौदे करने वाली कंपनी अतंरिक्ष ने साल 2005 में ये सौदा रद्द किया था।

बुधवार, 22 जून 2016

एक साथ 20 सेटेलाइट लॉन्च, यूएस-रूस क्लब में भारत शामिल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो ने आज इतिहास रच दिया। चेन्नई से करीब 80 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से कार्टोसैट-2 मिशन के तहत पहली बार रिकॉर्ड 20 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। इसरो के इतिहास में यह पहला मौका है, जब एकसाथ इतने उपग्रहों को प्रक्षेपित किया गया। पीएम मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को बधाई दी।

ये सेटेलाइट पीएसएलवी सी34 के जरिये अंतरिक्ष में छोड़े गए। भारत के पृथ्वी निगरानी अंतरिक्ष यान कार्टोसैट-2 समेत 20 उपग्रहों को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी-सी 34 आज सुबह 9 बजकर 26 मिनट पर उड़ान भरा। पीएसएलवी सी-34 के 20 सैटेलाइटों में से 17 सेटेलाइट दूसरे देशों के हैं। इसके अलावा दो सेटेलाइट देश के दो शिक्षा संस्थानों के हैं। इस लॉन्चिंग में एक सेटेलाइट कॉर्टोसैट 2 सीरीज का इसरो का अपना है।

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

इस साल अमेरिका समेत 7 देशों के 25 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा भारत

इस साल अमेरिका समेत 7 देशों के 25 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा भारत
इस साल अमेरिका समेत 7 देशों के 25 उपग्रह प्रक्षेपित करेगा भारत
भारत इस वित्त वर्ष में सात देशों के 25 उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा, इनमें सबसे ज्यादा अमेरिका के होंगे। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र प्रसाद ने बताया कि पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) से अब तक 21 देशों के 57 उपग्रहों का प्रक्षेपण भारत कर चुका है। जितेंद्र प्रसाद के पास अंतरिक्ष विभाग भी है।
उन्होंने बताया कि इसरो की वाणिज्यिक शाखा अंतरिक्ष ने अल्जीरिया और कनाडा से तीन उपग्रह छोड़ने के लिए समझौता किया है। जर्मनी के चार जबकि अमेरिका के 12 उपग्रहों का प्रक्षेपण होगा। जापान तथा मलेशिया का एक-एक उपग्रह प्रक्षेपित होगा। राज्यमंत्री ने कहा कि जनवरी, 2013 से दिसंबर, 2015 तक इसरो ने 13 देशों के 28 उपग्रह छोड़े। इनमें से कई सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका के भी थे। इससे इसरो ने आठ करोड़ यूरो की आय अर्जित की।

गुरुवार, 10 मार्च 2016

श्रीहरिकोटा से नेविगेशन उपग्रह-IRNSS-1F का सफल परीक्षण

श्रीहरिकोटा से नेविगेशन उपग्रह-IRNSS-1F का सफल परीक्षण
श्रीहरिकोटा से नेविगेशन उपग्रह-IRNSS-1F का सफल परीक्षण
 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आज आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी सी -32 के जरिए अपने छठे नेविगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस-1 एफ को प्रक्षेपित करेगा। इस प्रक्षेपण के लिए मंगलवार सुबह 9:30 बजे से ही 54 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। साल 2016 में भारत का यह दूसरा रॉकेट प्रक्षेपण होगा। पहले प्रक्षेपण के तहत 20 जनवरी को आईआरएनएसएस-1ई उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया था।

इसे भरोसेमंद पीएसएलवी सी-32 की सहायता से लांच किया जाएगा। यह लांचिंग पीएसएलवी सी-32 का 34वां बड़ा मिशन होगा। 44.4 मीटर लंबे IRNSS-1F का वजन 1,425 किलोग्राम है। इसका उद्देश्य अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) की तरह बेहतर नेविगेशन प्रणाली उपलब्ध करना है। इस उपग्रह के लांच के साथ भारत की नेविगेशन प्रणाली और बेहतर होने की उम्मीद है, क्योंकि पांचवे उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ ही भारत के पास 24 घंटे नेविगेशन प्रदान करने की क्षमता हो गई थी।