चार महीने का छोटू आज जिंदा नहीं होता अगर पर्यावरणविद वीना के कुमार ने उसकी जान ना बचाई होती। करीब तीन महीने पहले की बात है जब तीन पिल्ले सड़क पर पड़े हुए थे। तीन में से दो मर चुके थे जबकि एक बमुश्किल जिंदा बचा था।
तीनों पिल्लों संदिग्ध रूप से एक हादसे का शिकार हुए थे। वीना ने बताया 'जब मैं घटनास्थल पर पहुंची। एक पिल्ला कोमा में था, जो बेहोश पड़ा था। हम उसे तुरंत हेब्बल के सरकारी पशु चिकित्सालय लेकर आ गए। जहां उसे फर्स्ट एड दिया गया।'
हालांकि, डॉक्टरों ने कहा था कि छोटू मुश्किल से बच पाएगा। 'मैं उसे अपने घर ले आई और उसे खिलाया। साथ ही उसे मैं कई अस्पताल भी ले गई। आखिरकार, डॉक्टर गिरीश ने मुझे आशा दी। उन्होंने भौतिक चिकित्सा और दवा के लिए सुझाव दिया। जब मैंने छोटू को उठाया था तब वो मुश्किल से एक महीने का था।'
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