मंगलवार, 26 जुलाई 2016

उस देश की सरहद को कोई छू नहीं सकता, जिस देश की सरहद की निगेहबां हैंं आंखें

भगवत गीता का एक श्लोक है ‘हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्‌’ यानि 'या तो तू युद्ध में बलिदान देकर स्वर्ग को प्राप्त करेगा अथवा विजयश्री प्राप्त कर पृथवी का राज्य भोगेगा।' शायद इसी श्लोक को प्रेरणा मानकर भारत के उन शूरवीरों ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों को कारगिल की धरती से पीछे खदेड़ दिया था और आज ही के दिन 26 जुलाई 1999 को कारगिल की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराया था। तब से हर साल 26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाया जाता है।
आज दिन है देश के उन शूरवीरों को याद करने का जिन्होंने हमारे कल के लिए हंसते-हंसते अपना आज कुर्बान कर दिया और वीरगति को प्राप्त हो गए। आज हम ऐसे ही कुछ शूरवीरों के साहस की कहानी आपको बता रहे हैं।
शहीद मनोहर लाल
हरियाणा में भूना से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित ढाणी डूल्ट के वीर सिपाही मनोहर लाल ने कारगिल युद्ध में जिले से पहले शहीद का गौरव हासिल किया था। हालांकि जिले से चार नौजवान देश की सेवा करते हुए शहीद हुए थे।

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