केंद्र सरकार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों को कश्मीर में टाउनशिप में बसाने के लिए राज्य सरकार से भूमि चिन्हित करने के लिए कहा है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने यह जानकारी बुधवार को राज्यसभा में दी। शिवसेना सांसद संजय राउत के सवाल पर सांसद ने बताया कि घाटी में पंडितों के लिए अलग टाउनशिप के लिए जमीन की पहचान करने के लिए कहा गया है।
मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार भी पंडितों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने गत वर्ष पंडितों के लिए 3000 रोजगार व 6000 ट्रांजिट आवास बनाने को मंजूरी दी थी। 2008 के पैकेज में से अब तक 1719 रोजगार देने के साथ कश्मीर में 505 ट्रांजिट आवास बन चुके हैं। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2004 के प्रधानमंत्री पैकेज के तहत जम्मू के मुट्ठी, पुरखू, नगरोटा व जगटी में दो कमरों वाले 5242 मकान बनाए गए थे। इसके साथ शेखुपोरा बड़गाम में भी 200 फ्लैट बनाए गए। वर्ष 2008 में भी पंडितों के लिए 3000 नौकरियों, घर के निर्माण, वित्तीय सहयोग के लिए पैकेज की घोषणा की गई थी। राज्य सरकार पैकेज को लागू करने में जुटी हुई है। गौरतलब है कि वर्ष 1990 में कश्मीर में आतंकवाद के कारण पलायन करने वाले पंजीकृत पंडित विस्थापित परिवारों की संख्या 62 हजार है। इनमें से 40 हजार जम्मू में रह रही हैं। बीस हजार परिवार दिल्ली में रह रहे हैं। दो हजार परिवार देश के अन्य हिस्सों में बसे हैं।
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