मंगलवार, 7 जून 2016

जानें, पुलिस क्यों बार-बार बन रही है लोगों के गुस्से का शिकार

क्या पुलिस का इकबाल कम हो रहा है ? क्या राजनीति की बेजा दखलंदाजी की वजह से पुलिसिया खौफ कम हो रहा है ? या खुद पुलिस अपनी करतूतों की वजह से लोगों का शिकार बन रही है। खाकी पर हो रहे हमलों के लिए कोई एक वजह जिम्मेदार नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि पुलिसिया महकमे में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा की वजह से पुलिस आसानी से लोगों का निशाना बन रही है। इसके अलावा राजनीतिक स्तर पर दखलंदाजी की वजह से पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई भी लोगों के असंतोष की वजह बन जाती है। हाल ही में घटी कुछ घटनाओं की वजह से ये साफ होता है कि पुलिस का मनोबल गिर रहा है।
इलाहाबाद में बवाल
इलाहाबाद में आज अंतिम संस्कार के दौरान बवाल हो गया। झूंसी इलाके में अंत्येष्टि जल्दी करने के लिए पुलिस के दबाव से लोग नाराज हो गये। इसके बाद बवाल में पथराव के प्रशिक्षु आइपीएस सहित एक दर्जन पुलिसकर्मी घायल हैं। इलाहाबाद में रविवार शाम को सेंट्रल जेल नैनी के बाहर गोली तथा बम से हमला कर ज्ञान चंद्र की हत्या कर दी गई थी। आज ज्ञान चंद्र की अंत्येष्टि के दौरान जमकर बवाल हुआ। परिवार वालों ने रहिमापुर झूंसी तिराहे पर शव रख कर चक्का कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने अंत्येष्टि के लिए दवाब बनाया तो ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। पथराव को रोकने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। पथराव में प्रशिक्षु आइपीएस गणेश साहा समेत एक दर्जन पुलिस वाले घायल हो गये। घायलों को स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बीच पुलिस ज्ञान चंद्र के शव को कब्जे में लेकर दारागंज जा रही है। यहां अंतिम संस्कार कराया जाएगा। कल ज्ञानचंद्र के घर वाले जेल में बंद उसके पिता चंद्रभान को परोल पर छोड़े जाने की मांग पर अड़ गए थे। इस वजह से उसकी अंत्येष्टि नहीं हो सकी थी। इसे आज सुबह कराने का फैसला लिया गया था।

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