मंगलवार, 19 जुलाई 2016

आज के दिन शुरू हुआ था ज्ञान का प्रसार, तो इस साल गुरु पूर्णिमा की ये है विशेषता

गुरु पूर्णिमा वो दिन है, जब आदि योगी ने आदि गुरु में रूपांतरित होकर विश्व को आध्यात्मिक प्रक्रिया भेंट की। इस दिन पहली बार मनुष्यों को यह याद दिलाया गया कि अगर वे मेहनत करने के लिए तैयार हैं, तो अस्तित्व का हर दरवाज़ा खुला है।
गुरु पूर्णिमा की रात – आदिगुरू की रात है
गुरु पूर्णिमा की यह रात हमारे प्रथम गुरु, आदिगुरु की रात के रूप में जानी जाती है। मानव इतिहास में पहली बार आज के ही दिन मानव जाति को याद दिलाया गया था कि उनका जीवन पहले से तय नहीं हैं। अगर मेहनत करना चाहे तो अस्तित्व का हर दरवाजा इंसान के लिए खुला है। ज़रूरी नहीं कि इंसान साधारण-से कुदरती नियमों के दायरे में बंद रहे। सीमाओं का बंधन इंसान की सबसे बड़ी तकलीफ है। हिंदुस्तान और कुछ हद तक अमेरिका में हम जेलों में बंदियों के लिए प्रोग्राम करते रहे हैं और हर बार जेल के अंदर घुसते ही मुझे वहां की हवा में दर्द का अहसास हुआ है। ऐसा अहसास जिसका मैं कभी बयान नहीं कर सकता। मैं बहुत भावुक किस्म का इंसान नहीं हूं लेकिन ऐसा एक बार भी नहीं हुआ कि वहाँ जाकर मेरी आंखों में आंसू न उमड़े हों क्योंकि वहां की हवा में बेइंतहा दर्द है। यह सीमाओं में बंद रहने का दर्द है।

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