सोनल (बदला हुआ नाम) की स्थिति ने भारत के पुराने गर्भपात कानून पर से पर्दा हटा दिया है, उसने उन लाखों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण जगायी है जो एबनॉर्मल बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होती हैं।
सोनल न केवल रेप पीड़िता होने का दर्द भुगत रहीं बल्कि अब वे इस बात से भी दर्द में जी रही हैं कि उनकी गर्भ में पल रहा 24 हफ्ते का भ्रूण एबनॉर्मल है। यानि वे एबनॉर्मल बच्चे को जन्म देने वाली हैं जिसमें मानसिक और शारीरिक रूप से कमियां होंगी।
दिमाग संबंधित एनेन्सेफैली बीमारी से ग्रस्त 24 हफ्ते का भ्रूण ऐसे बच्चे के रूप में आएगा जिसकी दिमागी क्षमता विकसित नहीं होगी यह जान सोनल सुप्रीम कोर्ट से गर्भपात कराने की अनुमति मांग रही हैं।
भारत के 45 वर्ष पुराने गर्भपात कानून के अनुसार केवल 20 हफ्ते के भ्रूण को ही हटाया जा सकता है। सोनल को अपने कोख में पल रहे बच्चे के बारे में देर से पता चला। जब डॉक्टर ने इस बीमारी के बारे में बताया तो उसने गर्भपात का अनुरोध किया लेकिन डॉक्टरों ने इसे ठुकरा दिया क्योंकि भ्रूण 20 हफ्ते से अधिक का हो गया।
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