सरकार ने कहा है कि न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत के प्रवेश का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है। उसके अनुसार, इस वर्ष के अंत तक एनएसजी की एक विशेष बैठक और होगी। इसमें परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करने वाले भारत जैसे देशों की सदस्यता पर विचार होगा। इस बीच पीटीआई के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एनएसजी की सदस्यता का विरोध कर रहे चीन को साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है। उन्होंने चीन से कहा है कि दोतरफा संबंधों के लिहाज से उसे भारत के हितों का भी खयाल रखना ही होगा।
विकास स्वरूप का यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि एनएसजी पर विरोध करने से भारत के साथ संबंधों में दीवार खड़ी नहीं होगी। विकास स्वरूप ने हालांकि यह माना कि चीन से बातचीत जारी रहेगी। लेकिन उसे यह स्पष्ट बताया जाएगा कि वह जिस परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर न करने को आधार बना कर विरोध कर रहा है, हम उसके सभी प्रावधानों को लागू कर चुके हैं। ऐसे में भारत एनएसजी का सदस्य बनने की सभी शर्तो को पूरा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि एनएसजी सदस्यता को लेकर आ रही प्रक्रियागत अड़चनों को कूटनीतिक विफलता नहीं माना जाना चाहिए।
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