आज भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का पूर्ण सदस्य बन गया है। विदेश सचिव एस जयशंकर और फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जेमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में एमटीसीआर दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए गए। इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के साथ ही भारत ने चीन और पाकिस्तान को मिसाइल ताकत में पीछे छोड़ दिया है।
तीन दिनों पहले एनएसजी की सदस्यता पाने में मिली असफलता के बाद किसी बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत को ये कामयाबी मिली। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि पिछले वर्ष इसके लिए अर्जी दी गई थी। सभी प्रक्रिया पूरी हो गई थी।
पिछले साल इटली ने किया था विरोध
यूएस से न्यूक्लियर डील के बाद भारत एनएसजी और एमटीसीआर जैसे ग्रुप में एंट्री की कोशिश करता रहा है। ये ग्रुप न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल वेपन्स को कंट्रोल करने से जुड़े हैं। इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया ग्रुप केमिकल वेपन्स और वैसेनार अरेंजमेंट छोटे हथियारों वाला ग्रुप है। मरीन्स से जुड़े विवाद के चलते पिछले साल इटली ने भारत की एमटीसीआर में एंट्री का विरोध किया था। इटली के दो मरीन पर भारत के दो मछुआरों की हत्या का आरोप था। अब इन दोनों मरीन्स को इटली वापस भेजा जा चुका है। इसके बाद इटली भी भारत की इस ग्रुप में एंट्री को लेकर नर्म रुख अपनाया। इस महीने की शुरुआत में भारत हेग कोड ऑफ कंडक्ट को मानने के लिए तैयार हो गया था। ये बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रसार को रोकने से जुड़ा ग्रुप है। कोड ऑफ कंडक्ट मानने के बाद ये तय हो गया था कि एमटीसीआर में भारत को एंट्री मिल जाएगी।
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